लालगंज रायबरेली-हमारी भारत भूमि न केवल ज्ञान व बुद्धि के मामले में विश्वगुरू ही नहीं कहलाता अपितु प्रकृति सौंदर्य की अनुपम कला को समेटे हुए अलौकिक सुंदरता से विश्व को मंत्र मुग्ध कर देने वाली बहुआयामी व्यक्तित्व का संवाहक भी है जिसे इस काव्य रचना द्वारा समझा जा सकता है जिसके रचनाकार पंकज कुमार जी है।
है नमन इस मातृभूमि को, सजदा करता आत्मा ।
प्राणों से ज्यादा है ये प्यारा ,देव भू भारत हमारा ।।-२। चहुं दिशाओं में जडितहै ,रत्न मणि सी श्रृंखला ।
चरण रज को चूमता ,ये अति प्रमोदित सिंधुता।।-२
सौर्य मंडल सा प्रकाशित ,करती है ये हिमधरा।
कोटिशःमैं प्रणाम करता , जगत जननी हिंद धरा।।-२
बहु धर्म भाषा से है मिश्रित, इस जहां की वसुंधरा ।
श्रम की खुशबू से है फैला ,त्रिविध जग की येसुंदरा।।
मधुर स्वर को बिखेरती ,अठखेली करती तरंगिणी ।
वन ग्राम को गुंजित है करती ,विहंग कोकिलसी लली।।-
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